Wednesday, 30 April 2014

// एकदिन का राजा //


// एकदिन का राजा //

एक दिन का राजा हूँ मै..
नाम है मेरा मतदार..
आवभगत करते मेरी..
हर एक उम्मीदवार..!!

नजराने लाते हात जोड़ते..
कहते सब समजदार..
बिन मांगे सबकुछ देते..
भरा रहता दरबार..!!

व्होट मै उनको देता..
चुनवाता हू उम्मीदवार..
एक दिन का राजा मै फिर..
भटकता हू द्वारो द्वार..!!

गायब होते सारे नेता..
ना जाने छुपते किधर..
दंग मै रह जाता देख..
सिंग गधे के सर पर..!!

ढूंड़ता फिरू सालो साल..
ना मिलती कोई खबर..
हाथ जोड़ता उनको मै..
ना करते मेरी कदर..!!

गेंडे जैसी खाल है उनकी..
जाता खाली हर एक वार..
जाच परख के देखो भाई..
तुम हर एक उम्मीदवार..!!

*चकोर*
 

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