Saturday, 26 September 2020

क्षणभराचे प्रेम वेडे

 क्षणभराचे प्रेम वेडे..

क्षणभराचे प्रेम वेडे
किती प्रश्न घेऊन आले।
मोह फुलांचे मोहक
देही काटे लेवून आले।
धुंद परिमळ तयांचे
क्षण बेधुंद करून गेले।
नजरेचे शर विखारी
हृदयास भेदून गेले।
हे प्रेम तरी कसले
नाही कुणास कळले।
क्षणभराचे प्रेम वेडे
किती प्रश्न घेऊन आले।
अल्लड नदी जैसे
वळणावळणावर वळत गेले।
अंततः तेच पाणी
सागरात विलीन झाले।
ते ही मिटून गेले
ज्याने सर्वस्व वाहून नेले।
क्षणभराचे प्रेम वेडे
किती प्रश्न घेऊन आले।
पृथ्वीचे सूर्यावरती
तर चंद्राचे पृथ्वीवर जडले।
चंद्रच्या तेजाळ मुखड्याने
चांदण्यांस वेड लावले।
मग निशा सजते कुणासाठी
हे काजव्यास कुठे कळले।
क्षणभराचे प्रेम वेडे
किती प्रश्न घेऊन आले।
ज्यांनी प्रेम केले
त्यांना ते छळत गेले।
जे वंचित राहिले
ते ही तसेच जळत राहिले।
खाक झाले कैक प्रेमी
नवनवे येत राहिले।
क्षणभराचे प्रेम वेडे
किती प्रश्न घेऊन आले।
--सुनील पवार..✍️

Sunday, 20 September 2020

काळाच्या ओघात

 काळाच्या ओघात..

काळाच्या ओघात
बरेच बदल घडत गेले।
काही घडत गेले
तर काही बिघडत गेले।
दृश्य गडप झाले
अदृश्य उजेडात आले।
पटणारे रेखत गेले
न पटणारे खोडत गेले।
विचार विरोधात गेले
अविचार प्रवाहात आले।
अद्यातले मध्यात गेले
अन् मध्यातले सध्यात आले।
जितके जवळ आले
तितके अधिक दूर झाले।
तट्टू अडून बसले
अन् गर्दभ चौखूर उधळले।
प्रवाह मिसळत गेले
पण पाट वेगळे पडत गेले।
सुसंस्कृत झाल्या रस्त्यावरून
सगळेच कसे धडपडत गेले।
--सुनील पवार..✍️

Saturday, 19 September 2020

लाईमलाईट..हिंदी

 लाईमलाईट..

कल हमारे गौ को बछड़ा हुआ
ये बात उसने फेसबुक पर डाली
फिर सारे बैल जमा हुए
और पोस्ट उसकी व्हायरल हुई।
मैन पूछा गौ से,
गौ माता! क्या तुमको ये भी आता है?
तो बोली मुझको
अगर लाईमलाईट में रहना है
तो स्टेटस डालना जरूरी है।
आज हमारे बैल का बाप मरा
तो उसने स्टेटस अपडेट किया
लिखा मेरा बाप गुजर गया
साथ दो चार स्माइली छोड़ गया।
मैंने कहा बैल से
अरे पहले बाप को कंधा दे
झूठमूठ ही सही मगर थोड़ा रो ले
तो बोला वो, भाई वही तो कर रहा हु
देख कितने लोग श्रद्धांजलि दी रहे है
और पोस्ट व्हायरल हो रही है।
मैं सर्द रह गया देखके ड्रामा
साला बैल वहां से उठा ही नही
और बाप चिता पे लेटा नही
फिर लोगो ही ने उसको दफना दिया
समझ नही आता
ये कैसी लाईमलाईट है
जिसमें हर कोई अपने कर्म से चूक गया
माँ बेटे को और बेटा बाप को भूल गया।
--सुनील पवार..✍️

नभ भरून येईल..

 नभ भरून येईल..

नभ भरून येईल
कदाचित पाऊसही पडेल।
वाहून जाईल सर्वकाही
तरीही बरंच काही मागे उरेल।
एखादा डिर उगवेल तिथे
पुन्हा हिरवळ बिलगून घेईल।
फुलं बहरतील रंगबिरंगी
अन् गंध त्यांचा मातीला येईल।
मन हरवत जाईल त्यात
नकळत त्यावर जीव जडेल।
स्पर्शत जाईल झुळूक अंगास
अन् मन क्षणात मोहरून उठेल।
एखादा कवडसा होईल अंगार
तो तनमनावर छाप सोडेल।
पुन्हा आभाळ भरून येईल
अन् कदाचित पाऊसही पडेल।
--सुनील पवार..✍️

जब तक है..

 जब तक है..

जब तक है चलता रहेगा
अँधेरे में भी मचलता रहेगा।
सूरज बनने की ख़्वाईश नही
मगर दिया जैसा जलता रहेगा।
चाहें आँधी हो या तूफान
ये दौर यूँ ही चलता रहेगा।
बुझना तो है सभी को इक दिन
मगर उजाले का दोस्त बना रहेगा।
पल दो पल की है ज़िंदगी
फिर भी हर पल खास बना रहेगा।
ना रहेगा अँधेरा जीवन में हमेशा
ये विश्वास मन में बना रहेगा।
--सुनील पवार..✍️

पल भर का प्यार..

 पल भर का प्यार..

पलभर का प्यार पागल
कितने सवाल ले आया।
फूलों की हसरत थी
वो काँटो को ले आया।
ख़ुशबू के सौदागरों ने
पलमें बेहोश कर दिया।
छुरी की बात छोड़ो
क़त्ल नजरों से कर दिया।
ये प्यार क्या चीज है?
कोई भी समझ ना पाया
पलभर का प्यार..
नदी की धार जैसा
हर मोड़ पे मुड़ गया।
पानी का बहाव था
वो सागर से जुड़ गया।
वजूद उनका भी मिट गया
जो सबकुछ बहा के ले गया।
पल भर का प्यार..
धरा का सूरज पे और
चाँद का धरा पर दिल आया।
चाँद की झलक पाने को
चाँदनी का मन ललचाया।
फिर रात सजी किसके लिए?
जुगनू कभी समझ ना पाया।
पल भर का प्यार..
प्यार जिसको भी मिला
वो हर पल छलता गया।
प्यार जिसे मिल ना पाया
वो भी मन में जलता गया।
कितने खाक हुए प्यार में
प्यार हरदम बढ़ता गया।
पल भर का प्यार पागल
कितने सवाल ले आया।
--सुनील पवार..✍️

चाँद..



चाँद..
चाँद कहीं खो गया
बादलों में सो गया।
वर्षा रानी झट से आई।
बूंदाबांदी फट से हुई।
पानी पानी जम गया
धरती सागर बन गया।
कागज की नाव चलाई
मेंढ़क की सवारी हुई।
इक हवा का झोंका आया
वो बादलों को ले गया।
बरसात अब थम गई
चाँद की नींद खुल गई।
--सुनील पवार..✍️

Tuesday, 1 September 2020

निरोप तुमचा घेतो

 निरोप तुमचा घेतो..

निघालोय मी
आता निरोप तुमचा घेतो।
पुढच्या वर्षी नक्की येईन
असे वचन तुम्हास देतो।
यंदा डीजेचा गदारोळ नव्हता म्हणून
उंदीर मामाही निःचिंत दिसले।
सुपाएवढे कान माझे
भजन,आरतीनेच संतोष पावले।
हिडीस नृत्याला आळा बसला
उंचीची स्पर्धा कुठे दिसली नाही।
इवले नेत्रही सुखावले माझे
ते मिटण्याची पाळी आली नाही।
डिजिटल का होईना पण
तुम्ही मनोभावे माझे दर्शन घेतले।
बाजारू स्वरूप कुठेच नव्हते
ह्या गोष्टीचे अधिक कौतुक वाटले।
तसे ठाऊक आहे मला
हे सर्व भीतीपोटी निपजलंय।
संकट आलंय वाडी वस्त्यांवर
म्हणून स्वतःस घरी कोंडून घेतलंय।
पण विश्वास बाळगा मनात
आलं संकट दूर होणार आहे।
स्वच्छतेची कास, पर्यावरण रक्षण
हेच तुम्हास तारक ठरणार आहे।
मनी आशा बाळगतो की,
हाच भक्तिभाव पुढच्या वर्षी दिसेल।
तुमच्या सुदृढ मनाचा मोरया नाद
माझ्या हृदयास येऊन भिडेल।
|| बोला गणपती बाप्पा मोरया||
--सुनील पवार..✍️

प्रिय उम्मीद..

 प्रिय उम्मीद..

प्रिय उम्मीद
साथ कभी ना छोड़ना।
तुम से ही सीखा है
हमने ख़तरों से लड़ना।
तुम हो तो
काँटे भी फूल बनते है।
तुम ना हो तो
इरादे डगमगा जाते है।
प्रिय उम्मीद
हाथ हमेशा थामे रहना।
कभी ना छोड़ना
अँधेरे में राह दिखाते रहना।
--सुनील पवार..✍️

हम भी परिंदों की तरह

 हम भी परिंदों की तरह..

हम भी परिंदों की तरह
उड़ान भरनें की चाह रखते है।
पर लोग न जानें क्यों?
बढ़ते कदमों की राह रोकते है।
गम इस बात का नहीं के
वो आये दिन रुकावट बनते है।
दुःख तो इस बात का है की
वो दूसरों को कम आँकते है।
खैर दुनियां का दस्तूर यहीं है
ये सोचकर हम चलते रहते है।
हमारी दिल की चाह हम
अपने ही दिल में रखते है।
--सुनील पावर..✍️

तेव्हा कळले तिला

 तेव्हा कळले तिला..

आपल्या फाटक्या आयुष्याची
तिने मारली आर्त शब्दकिंकाळी।
अन् ऐकणाऱ्याच्या मुखातून
केवळ वाह वाह निघाली।

तिने मांडला ओळीत
ओरबाडलेल्या लक्तरांचा भाव।
विफल प्रेमाचा विकल अंतर्भाव
पण तिच्या वाट्यास आला केवळ वॉव।

तिने केला कागदी प्रतिकार
चढवीत शब्दांना धार।
नकळे किती कळले कोणास
पण गर्दी जमली मोक्कार।

तिने बदलले आपले स्वरूप
जाणून समाजाचे काळे रूप।
तिला वाटले बदल घडेल कदाचित
पण वाट्यास आले केवळ क्षणिक अप्रूप।

तिने केला रूपक शृंगार
अन् घातले अंगभर अलंकार।
तेव्हा स्पष्ट जाणवले तिला
तिच्याभोवती होता केवळ लोचट बाजार।
--सुनील पवार..✍️

लिहतो कविता तुझ्यासाठी..

लिहतो कविता तुझ्यासाठी..

लिहतो कविता तुझ्यासाठी
मोह मनाचा आवरत नाही।
तुझे फुललेलं रूप पाहून
मन सावरता सावरत नाही।
तुजसाठीच येती अंबरधारा
नभी फुलतो मेघ पिसारा।
अंग मातीचे गंधाळते अन्
पिसे भरून फिरतो वारा।
तू खेळत राहते वाऱ्यासवे
तो झुलवीत राहतो तुझी फुले।
तू देखणा साज लेऊन घेता
हिरव्या पदारावरती नक्षी झूले।
तुझ्या रूपाचा मोह नभास होतो
तोही सप्तरंग उधळत येतो।
तू रंगात त्याच्या न्हाऊन जाते
तो मोत्याने तुज मढवत जातो।
त्या मोत्यांनाच वेचून आता
मी सर शब्दांची ओवत जातो।
तो थांबला जरी बरसण्याचा
तरी लेखणीतून झरत राहतो।
--सुनील पवार..✍️

मुझें जाने दो वहाँ..

 मुझें जाने दो वहाँ..

मुझें जाने दो वहाँ
जहाँ मौजों से साहिल मिलता है।
भँवरे की चाहत में
कमल का फूल खिलता है।
अँधेरे से लिपटकर
दिया रातभर जलता रहता है।
उसीकी चाहत में
पतंगा खुद को मिटा देता है।
--सुनील पवार..✍️