पल भर का प्यार..
पलभर का प्यार पागल
कितने सवाल ले आया।
फूलों की हसरत थी
वो काँटो को ले आया।
ख़ुशबू के सौदागरों ने
पलमें बेहोश कर दिया।
छुरी की बात छोड़ो
क़त्ल नजरों से कर दिया।
ये प्यार क्या चीज है?
कोई भी समझ ना पाया
पलभर का प्यार..
नदी की धार जैसा
हर मोड़ पे मुड़ गया।
पानी का बहाव था
वो सागर से जुड़ गया।
वजूद उनका भी मिट गया
जो सबकुछ बहा के ले गया।
पल भर का प्यार..
धरा का सूरज पे और
चाँद का धरा पर दिल आया।
चाँद की झलक पाने को
चाँदनी का मन ललचाया।
फिर रात सजी किसके लिए?
जुगनू कभी समझ ना पाया।
पल भर का प्यार..
प्यार जिसको भी मिला
वो हर पल छलता गया।
प्यार जिसे मिल ना पाया
वो भी मन में जलता गया।
कितने खाक हुए प्यार में
प्यार हरदम बढ़ता गया।
पल भर का प्यार पागल
कितने सवाल ले आया।
--सुनील पवार..
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