shabda Tarang
Saturday, 19 September 2020
चाँद..
चाँद..
चाँद कहीं खो गया
बादलों में सो गया।
वर्षा रानी झट से आई।
बूंदाबांदी फट से हुई।
पानी पानी जम गया
धरती सागर बन गया।
कागज की नाव चलाई
मेंढ़क की सवारी हुई।
इक हवा का झोंका आया
वो बादलों को ले गया।
बरसात अब थम गई
चाँद की नींद खुल गई।
--सुनील पवार..
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