shabda Tarang
Tuesday, 1 September 2020
प्रिय उम्मीद..
प्रिय उम्मीद..
प्रिय उम्मीद
साथ कभी ना छोड़ना।
तुम से ही सीखा है
हमने ख़तरों से लड़ना।
तुम हो तो
काँटे भी फूल बनते है।
तुम ना हो तो
इरादे डगमगा जाते है।
प्रिय उम्मीद
हाथ हमेशा थामे रहना।
कभी ना छोड़ना
अँधेरे में राह दिखाते रहना।
--सुनील पवार..
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