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Saturday, 19 February 2022

सहजीवनाची कैक वर्ष

सहजीवनाची कैक वर्ष..

पाखरांसारखी उडून गेली
सहजीवनाची कैक वर्ष!
पंख लाभता पाखरांना
मनी दाटला अमाप हर्ष!!

दुःख सारे विरून जाण्या
पुरेसे आहे एक हास्य!
केवळ एक प्रेम स्पर्श
सुख हसत पत्करे दास्य!!
--सुनिल पवार..✍️

Thursday, 29 July 2021

तू आणि मी

 


 तू आणि मी

आपण रोज सकाळी भेटतो।

चैतन्याचा प्रवाह

तेव्हाच तर संचारतो।


मी श्वासात भरतो तुला

ओठासमीप नेतो।

सकाळचा चहा 

खरंच अमृततुल्य असतो।

--सुनील पवार..✍🏼

🌻सुप्रभात🌞शुभ सकाळ🌻

Monday, 4 January 2021

ओलावा

 || ओलावा ||

========
जेव्हा,
शब्दांचा ओलावा अपेक्षित असतो
तेव्हा,
नेमका कोरडेपणा वाट्यास येतो..
असा,
नेहमीच माझा अपेक्षाभंग होतो
अन्
ओलावा नकळत डोळ्यातुन उतरतो..!!
--सुनील पवार..

पल दो पल के लिए

 पल दो पल के लिए..

पल दो पल के लिए साथ मिल जाए
काफ़ी है।
यादों के सहारे ज़िंदगी कट जाए
काफ़ी है।
वैसे भी कितनी जरूरतें है इंसान की
कुछ हौसला, कुछ उम्मीदें मिल जाए
काफ़ी है।
--सुनील पवार..


सूर्य मावळलाच नाही तर

सूर्य मावळलाच नाही तर..

सूर्य मावळलाच नाही तर
जीवनात कधी कातरवेळ येणार नाही
असं नाही।
पण इतके मात्र खरे की,
चंद्राचे देखणेपण आणि चांदण्यांचे अंगण
पुन्हा कधी सजणार नाही।
--सुनील पवार..

कल कभी आता नही

 कल कभी आता नही..

क्या रुक नही सकते
पल दो पल।
क्या छुटे हाथ मिल पाएंगे
फिरसे कल।
लोग कहते है की
कल का कोई भरोसा नही।
और हम भी मानते है की
कल कभी आता नही।
--सुनील पवार.

हम चुप बैठे है

 हम चुप बैठे है..

सबकुछ जानते हुए भी
हम चुप बैठे है।
क्यों की,
हम ने देखा नही
मगर हम मानते है
अपने तो अपने होते है।
--सुनील पावर..

Thursday, 15 October 2020

मैंने जीना सीख लिया

मैंने जीना सीख लिया..
न घुटेगा अब दम मेरा
मैंने मरकर जीना सीख लिया।
न दबेगा अब हौसला मेरा
मैंने गिरकर उठना सिख लिया।
तुम बिछा दो राह में काँटे
मैंने छालों को पाँव बना दिया।
या उजाड़ दो तुम घर मेरा
मैंने खुद को छाँव बना दिया।

--सुनील पवार....


Saturday, 3 October 2020

शाम होने वाली है

 शाम होने वाली है..

शाम होनेवाली है
आ रंगों का लुत्फ़ उठाते है।
घड़ी दो घड़ी
हम तुम साथ बैठ जाते है।
फिर जब रात होगी
पहचान अँधेरे में गुम होगी।
किसको पता है
कल हम कहाँ और तुम कहाँ होगी।
--सुनील पवार..✍️

Tuesday, 1 September 2020

मुझें जाने दो वहाँ..

 मुझें जाने दो वहाँ..

मुझें जाने दो वहाँ
जहाँ मौजों से साहिल मिलता है।
भँवरे की चाहत में
कमल का फूल खिलता है।
अँधेरे से लिपटकर
दिया रातभर जलता रहता है।
उसीकी चाहत में
पतंगा खुद को मिटा देता है।
--सुनील पवार..✍️

Friday, 14 August 2020

क्या नाम दू तुझे..

 क्या नाम दू तुझे..

तेरी तरफ आते हुए
मैंने फ़िजा को देखा।
फूल वहां खिले
जहां तूने पाँव रखा।
क्या नाम दू मैं तुझे
गुल कहूँ या गुलशन।
तेरे आने से महक उठा
मेरे जीवन का आँगन।
--सुनील पवार..✍️
Image may contain: flower, text that says 'क्या नाम दू मैं तुझे तेरी तरफ आते हुए मैंने फ़िजा को देखा| फूल वहां खिले जहां तूने पाँव रखा। क्या नाम दू मैं तुझे गुल कहूँ या गुलशन। तेरे आने से महक उठा मेरे जीवन का आँगन। सुनील पवार..'


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अपनी तलाश में हम..

 अपनी तलाश में हम..

अपनी तलाश में
हम निकल तो आए
पर पहचाने कैसे?
हम तस्वीर लेना ही भूल गए।
हमें नही पता
असली रंग कौनसा है।
दूसरों की बात क्यों करू
यहाँ खुद को पहचानना मुश्किल है।
--सुनील पवार..✍️
Image may contain: text that says 'अपनी तलाश में हम अपनी तलाश में हम निकल तो आए पर पहचाने कैसे? हम तस्वीर लेना ही भूल गए| हमें नही पता असली रंग कौनसा है| दूसरों की बात क्यों करु यहाँ खुद को पहचानना मुश्किल है| सुनिल पवार...(काव्यचकोर) Your uote.in'

Thursday, 6 August 2020

अब आ गई हो तो..

अब आ गई हो तो..

ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी
ज़ब तेरा आना हुआ।
तेरे इस क़दर आने से
मिट्टी का सोना हुआ।
अब आ गई हो तो
जाने के बहाने ना कर।
मरे उम्मीद के कटोरे में
मोतियों के दाने भर।
--सुनील पवार..✍️
Image may contain: one or more people, text that says 'अब आ गई हो तो ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी ज़ब तेरा आना हुआ| तेरे इस क़दर आने से मिट्टी का सोना हुआ| अब आ गई हो तो जाने के बहाने ना कर| मरे उम्मीद के कटोरे में मोतियों के दाने भर। सुनील पवार..'
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पहले जैसे बात नहीं..

पहले जैसे बात नहीं..

पहले जैसी बात नहीं
वो दिन नहीं, वो रात नहीं।
हम भी वहीं, तुम भी वहीं
पर अब वो मुलाकात नहीं।

खैर जाने दो,
हालात बदले है जरिए नहीं।
तुम अपनी कहो
बदले तो हम अब भी नहीं।
--सुनील पवार..✍️
Image may contain: text that says 'पहले जैसी बात नहीं पहले जैसी बात नहीं वो दिन नहीं, वो रात नहीं| हम भी वहीं, तुम भी वहीं पर अब वो मुलाकात नहीं| खैर जाने दो, हालात बदले ह जरिए नहीं| तुम अपनी कहो, बदले तो हम अब भी नहीं| काव्यचकोर... Your uote.in'
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प्रिय दादा/ताई

||रक्षाबंधनाच्या हार्दिक शुभेच्छा||

प्रिय दादा/ताई
नको बाहेर पडण्याची घाई।
संकटाची वेळ आहे
करू दुरूनच दिलजमाई।
प्रेमाचा धागा अतूट खरा
राखीचा सण व्हर्चुअल करा।
नेटवर्किंगच्या पुलावरून
प्रतिकात्मक भेटीने साजरा करा।
--सुनील पवार..✍️
Image may contain: text that says '।|रक्षाबंधनाच्या हार्दिक शुभेच्छा।। प्रिय दादा ताई नको बाहेर पडण्याची घाई| संकटाची वेळ आहे करू दुरूनच दिलजमाई| प्रेमाचा धागा अतूट खरा राखीचा सण व्हर्चुअल करा| नेटवर्किंगच्या पुलावरून प्रतिकात्मक भेटीने साजरा करा| Your uote.in काव्यचकोर...'
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