Wednesday, 30 April 2014

// मन वारा //



// मन वारा //

मन कधी झुळूक वा-याची..
फुंकर हळुवार स्पर्शून जाई..
उलथवे कधी मन मानस..
मन वादळ बनोनी येई..!!

क्षणात उंच घेते भरारी..
क्षणात गिरकी खाली घेई..
कधी मन भिरभिर भवरा..
शांत कधी संयमी होई..

निरंतर वारा वाहे मन..
ठाव न त्याचा कोणी घेई..
मन अथांग सागर चंचल..
रसरत्ने वसती त्याच्या ठाई..!!

*चकोर*

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