Sunday, 26 July 2020

लिखतें हैं,मिटाते हैं..


लिखतें हैं,मिटाते हैं..
लिखतें हैं मिटाते हैं
खेल यूँ ही चलता हैं।
रेत पर लिखा नाम
कहाँ टिका रहता हैं।
मैंने देखा!
इक आशिक ने लिखा नाम
किसी लहर ने मिटा दिया।
वो चला गया मायूस हो कर
पर कोई और वहाँ आ गया।
--सुनील पवार..✍️
324
People Reached
16
Engagements



12

No comments:

Post a Comment