shabda Tarang
Sunday, 26 July 2020
लिखतें हैं,मिटाते हैं..
लिखतें हैं,मिटाते हैं..
लिखतें हैं मिटाते हैं
खेल यूँ ही चलता हैं।
रेत पर लिखा नाम
कहाँ टिका रहता हैं।
मैंने देखा!
इक आशिक ने लिखा नाम
किसी लहर ने मिटा दिया।
वो चला गया मायूस हो कर
पर कोई और वहाँ आ गया।
--सुनील पवार..
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