*रात का अफ़साना*
दिल मे अंधेरा
लब्ज खामोश
सुनी सड़के
सुनी आग़ोश
रात अकेली
रोती सिसकती
न जाने
किसके इंतजार में
आँसू बहाती
क्यों हमें अब
नींद नही आती।
--सुनिल पवार..✍️
लब्ज खामोश
सुनी सड़के
सुनी आग़ोश
रात अकेली
रोती सिसकती
न जाने
किसके इंतजार में
आँसू बहाती
क्यों हमें अब
नींद नही आती।
--सुनिल पवार..✍️

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