Saturday, 18 May 2019

मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??

मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??

बचपन के खेल फिरसे पुकार रहे है
मानो उन में भी कुछ खालीपन सा है
गिल्ली डंडा, साइकल का पहिया
लगोड़ी का बॉल हो, या फिर क्रिकेट का हो
मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??
वह स्कूल के दिन, वह मास्टर की डांट
वह खिलते चेहरे और उसकी मुस्कुराहट
वह पहला प्यार, और दिल की झनझनाहट
टीना,मीना,पुनम तुम सब याद आ रहे हो
मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??
वह कॉलेज के दिन, वह दोस्ती का रंग
वह प्यार का संग, मीठे सपनो की उमंग
वह कैंटीन की चाय और प्याली के तरंग
दिल के थे सब राजा, चाहे जेब खाली हो
मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??
जीवन की भागदौड़ में सब पीछे छूट गया
जिंदगी धूप हो गई और न बचा कोई साया
देखते ही देखते वह आख़री मकाम आया
अब आकर दोस्तो कुछ देर के लिए कंधा दो
मेरे दोस्तों..! तुम कहाँ हो..??
***सुनिल पवार...✍️

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