Thursday, 23 May 2019

ऐ जिंदगी..

ऐ जिंदगी..
ऐ जिंदगी अब तू ही बता
आखिर क्या हुई है मुझसे ख़ता।
क्यों नाराज है इतनी
के तुझको हँसना भी नही आता।
कहा गए वह दिन सुनहरे
कहा गयी वह चाँदनी रातें।
अपनी पलकों पर सजाते तुमको
हम कभी ना थकते थे हारते।
अब क्यों अफसोस हो रहा है
के जिंदगी मैंने तुझसे प्यार किया।
हमे तो बस खुशियाँ बाटनी थी
और तुम ने आसुओ का सैलाब दिया।
किस बात की दे रही हो सजा
सच सच बता अपनी दिल की बात।
कब बदलेंगी फिर जिंदगी मेरी
और कब बदलेंगें मेरे बत्तर हालात।
--सुनिल पवार..✍🏼

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