जिंदगी.....
जिंदगी जैसे
जलती धूप में तनहा पेड़
फैली हुई शाखाओ में
ना रहा कोई मेल..
उड़ गए पंछी सारे
खोकली हो गई जड़े
अब तो सूखे पत्तों की तरह
आँसू बहाए जिंदगी
न जाने कौनसा खेल?
खेल रही है यह जिंदगी..!!
***सुनिल पवार...✍️
फैली हुई शाखाओ में
ना रहा कोई मेल..
उड़ गए पंछी सारे
खोकली हो गई जड़े
अब तो सूखे पत्तों की तरह
आँसू बहाए जिंदगी
न जाने कौनसा खेल?
खेल रही है यह जिंदगी..!!
***सुनिल पवार...✍️

No comments:
Post a Comment