पापा तुम्हारे होने से..
पापा तुम्हारे होने से
घर का घरपन बना रहा।
आपही के बलबूते पर
सीना अपना तना रहा।
घर का घरपन बना रहा।
आपही के बलबूते पर
सीना अपना तना रहा।
धूप हमे जला न सकी
तुम पेड़ बन कर खड़े रहे।
आँधी हमे उड़ा न पाई
तुम पर्बत से जमकर अड़े रहे।
तुम पेड़ बन कर खड़े रहे।
आँधी हमे उड़ा न पाई
तुम पर्बत से जमकर अड़े रहे।
पर आप के जाने से
मानो ज़िन्दगी बिखर गई।
वीरान हो गया घर
और आँखों मे नमी रह गई।
मानो ज़िन्दगी बिखर गई।
वीरान हो गया घर
और आँखों मे नमी रह गई।
अब कोई पहचान नहीं हमारी
रिश्तों का आँगन भी खाली हो गया।
अब ज़िन्दगी में बचा सिर्फ अँधेरा
जब से बाप नाम का, बुझ गया है दिया।
काव्यचकोर..✍️
रिश्तों का आँगन भी खाली हो गया।
अब ज़िन्दगी में बचा सिर्फ अँधेरा
जब से बाप नाम का, बुझ गया है दिया।
काव्यचकोर..✍️

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