shabda Tarang
Monday, 13 February 2017
|| खामोशी ||
|| खामोशी ||
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खामोश लब्जो पिछे
न जाने यह कैसी
अजीबसी कशिश है..
कैसे समजावु मगर
किसे और क्या
पाने की कोशिश है..
बस यु समझ लो
आजमाईश की
यह अनोखी तपिश है..
खामोश दिल को
समझने की
दिल की गुजारिश है..!!
****सुनिल पवार...
✍🏽
😊
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