।। यादों की बरात ।।
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हर दिन निकलती है
अब यादों की बरात..
बरबादी के जश्न हम मनाते है दिन रात..!!
हसकर किये है खाली
कितने गमो के प्याले..
देंगे इस बात की गवाही
गली मोहाल के मधुशाले..!!
अक्सर बातो में होता है
उन्ह लम्हों का ज़िक्र..
करता है अब भी दिल
उस बेवफा का फ़िक्र..!!
ता उम्र मनाएंगे हम
अब जश्न-ए-बरबाद
है दफन सीने में अब
सिर्फ तुम्हारी याद..!!
******सुनिल पवार.......
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