Monday, 14 November 2016

|| ज़रा गौर करो ||

|| ज़रा गौर करो ||
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खुशियोका प्याला
बिखर गया जमीन पर..
चीख-चीख के कह रही सच्चाई
ज़रा गौर करो नमी पर..!!


पानी तो है कुए में
मगर पेहरा बड़ा सख्त है..
बेबस है आम यहाँ
बाकी सब मस्त है..!!

कट रही है जिंदगी कतार में
अब हाथो में है पेट यहाँ..
काले गोरे का भेद नहीं
ठंड कमरे में लेटा हैं शेठ वहां..!!

पल भर का चैन कभी
हमें भी दे कोई उधार में..
रोज मर्रा की जिंदगी में
आश्वासक कोई सुधार दे..!!

आएंगे अच्छे दिन कभी
इसमें कोई शक नहीं..
आखिर की सोच हमारी
साला अपना इसमें लक नहीं..!!
*****सुनिल पवार...✍🏽

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